मातृभाषा
एक माँ ने मुझको जन्म दिया,
एक माँ ने मुझको पोषा है।
शब्द स्वरों का ज्ञान दे उसने,
नयन पटल को खोला है।
अक्षर लिखती हूँ, मैं उसके,
शब्द मेरे कहलाते हैं।
ज्ञान दिया उसने मुझको,
दर्शन मेरे नाम किया।
हे यशोमाँ, इन उपकारों का
कैसे कर्ज़ चुकाऊँगी?
अपने कर्तव्यों का मैं
पालन तो कर पाऊँगी?
दे आशीष मुझे बस इतना
तेरा नाम बढ़ाऊँ मैं।
तू मुझसे जानी जाए
परचम वो फहराऊँ मैं।
रुचि शुक्ला