अक्षरों की उलझन
ड डमडम बजता है
सड़क पर ड़ खड़कता है
ढ ढक्कन बनने से तो
पढ़ का ढ़, तुम पढ़ लेना
कुछ कढ़ लेना
कुछ बढ़ लेना
ज्ञ ज्ञानी तुम बन लेना
ठ ठसक के चलना है तो
ठ से पाठ समझ लेना
प्रण कर लेना
रण क्या करना
ण के क्षण को ही जी लाना
मेहनत श्रम से
जब कर लेना
विश्राम चैन से ले लेना
श्र श्रद्धा का जब गान सुनो
ऊपर का सब भान करो
अब भी बाकी कुछ रह जाए
फ़िर आकर समझ लेना..
रुचि शुक्ला