“तस्वीर बदलती नहीं”
दुनिया जमाने का दस्तूर है
हम हँसे, ये हँसे
हम खफा, ये खफा
ये बहुत खूब है
और घिना भी बहुत
दोनों पट हैं यहां
चाहे जो देख लें
रंग बदलते रहे
उस तस्वीर के
युग बदलने का
जिस पर नहीं है असर
सदियाँ गईं, हम रहे और गए
पर बदला ज़माना
कभी भी नहीं
देव मिलते यहीं
दैत्य भी कम नहीं
चाह जो हम करें
हम वही देख लें।
रूचि शुक्ला
दुनिया जमाने का दस्तूर है
हम हँसे, ये हँसे
हम खफा, ये खफा
ये बहुत खूब है
और घिना भी बहुत
दोनों पट हैं यहां
चाहे जो देख लें
रंग बदलते रहे
उस तस्वीर के
युग बदलने का
जिस पर नहीं है असर
सदियाँ गईं, हम रहे और गए
पर बदला ज़माना
कभी भी नहीं
देव मिलते यहीं
दैत्य भी कम नहीं
चाह जो हम करें
हम वही देख लें।
रूचि शुक्ला

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