“अवनीश”
एक छोटा सा बालक मुझको
नानी याद दिलाता है
ऊपर - नीचे, नीचे - ऊपर
रोज़ गुलाटी खाता है
इधर न देखो, उधर न देखो
बस मेरी ही बात सुनो
मेरे आगे पीछे घूमो
उछलो कूदो डांस करो
अब घोड़ा तुम बन जाओ
मैं उसके ऊपर बैठूंगा
तुम छिपो मैं ढूढूँ तुमको
छिप्पा - छइया खेलूँगा
मुझको निन्ना आई है
मम्मा लोरी गाओ तुम
भोर जो मेरी हो जाए तो
बुब्बू लेकर आओ तुम
मम्मा मम् मम्, मम् मम्, मम् मम्
मम् मम्, मम् मम् करता है
गुस्से में जो आए तो
बिन शब्दों के लड़ता है
मटकू मटकू चलने वाला
अचकू - मचकू करता है
मुह फाड़ कर गाल चूमता
लार लार कर रुकता है
ममता से मन भर जाए
वो हा - हा, हा - हा हँसता है।
रूचि शुक्ला
एक छोटा सा बालक मुझको
नानी याद दिलाता है
ऊपर - नीचे, नीचे - ऊपर
रोज़ गुलाटी खाता है
इधर न देखो, उधर न देखो
बस मेरी ही बात सुनो
मेरे आगे पीछे घूमो
उछलो कूदो डांस करो
अब घोड़ा तुम बन जाओ
मैं उसके ऊपर बैठूंगा
तुम छिपो मैं ढूढूँ तुमको
छिप्पा - छइया खेलूँगा
मुझको निन्ना आई है
मम्मा लोरी गाओ तुम
भोर जो मेरी हो जाए तो
बुब्बू लेकर आओ तुम
मम्मा मम् मम्, मम् मम्, मम् मम्
मम् मम्, मम् मम् करता है
गुस्से में जो आए तो
बिन शब्दों के लड़ता है
मटकू मटकू चलने वाला
अचकू - मचकू करता है
मुह फाड़ कर गाल चूमता
लार लार कर रुकता है
ममता से मन भर जाए
वो हा - हा, हा - हा हँसता है।
रूचि शुक्ला
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