माँ की इच्छा
एक माँ से जब मैने बोला
बच्चे तेरे अच्छे हैं
सब बात ये तेरी सुनते हैं
वो मुस्काई , खुद आप हँसी
फिर नज़र उठा , वो फ़रमाई
ये मस्त मदारी से पूछो
बन्दर को नाच नचाता है
या ताल से ताल मिलाता है
जो मूल्य चुने जीवन भर थे
वो संस्कार, मैं देती हूँ
बस कहती हूँ, तुम राह चुनो
ये निलय डगर तुम पार करो
मैं साथ तुम्हारे हर पल हूँ
तुम अच्छे हो, तो खुद से हो
तुम बुरे बने, तो मैं कारण
इतनी इच्छा रखती हूँ
मैं माँ होने पर नाज़ करूँ
और दुनिया तुमको प्यार करे।
रूचि शुक्ला
एक माँ से जब मैने बोला
बच्चे तेरे अच्छे हैं
सब बात ये तेरी सुनते हैं
वो मुस्काई , खुद आप हँसी
फिर नज़र उठा , वो फ़रमाई
ये मस्त मदारी से पूछो
बन्दर को नाच नचाता है
या ताल से ताल मिलाता है
जो मूल्य चुने जीवन भर थे
वो संस्कार, मैं देती हूँ
बस कहती हूँ, तुम राह चुनो
ये निलय डगर तुम पार करो
मैं साथ तुम्हारे हर पल हूँ
तुम अच्छे हो, तो खुद से हो
तुम बुरे बने, तो मैं कारण
इतनी इच्छा रखती हूँ
मैं माँ होने पर नाज़ करूँ
और दुनिया तुमको प्यार करे।
रूचि शुक्ला

No comments:
Post a Comment