"प्रारब्ध से प्रारम्भ" 2005 से 2015 के दौरान लिखी गईं मेरी कविताओं का संग्रह है।मन का मर्म स्पर्श इन भाव प्रधान कविताओं की मुख्य विशेषता है।कई कविताओं में दर्शन की झलक देखने को मिलती है। "मेरी कविता कुछ नहीं, आत्मा के बोल हैं। प्रारब्ध; लिखता गया, जज़्बात को गढ़ता गया, आज अर्पण आपको, आरम्भ ये प्रारम्भ है।" मेरा प्रारब्ध पुनः चरितार्थ हो इसी आशा के साथ, रूचि शुक्ला
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