पापा
वो प्यार, वो अहसास
एक भरोसे के साथ
मुझे संभाला उन्होंने
लड़कपन के साथ
क्या लिखूँ मैं उनके बारे में
उन्हें शब्दों में समेटना मुश्किल है
दिल में कई अरमान हैं मेरे
अपने पापा को लेकर
ये कागज़, ये कलम
नाकाफ़ी हैं बयानी में
जब मुश्किल रहा समय
सर हाथ उनका काफी रहा
मुझे बड़े नाज़ों से पाला उन्होंने
हर वक्त उनकी जुबाँ पर मेरा नाम रहा
आज अकेली बैठी याद करती हूँ
ले आँखों में आँसू उन्हें प्यार करती हूँ
मेरे पापा तुम कितने पास हो दिल के
हर शब्द में सिर्फ ज़ज्बात लिखती हूँ
ये प्यार कुछ नहीं उस दुलार के आगे
मेरे आँखों में आँसू हों
परेशाँ आप होते हैं
मेरे बोल हर वक्त याद रखते हैं
एक सच बताऊँ तो हँसना नहीं
डरता है हीरो आप से
मेरे पापा, आप शान हो मेरी मेरी
हिम्मत एक पहचान हो मेरी
चँद शब्दों में, मैं कह नहीं सकती
इतना जान लो बस "जान" हो मेरी।
रूचि शुक्ला
वो प्यार, वो अहसास
एक भरोसे के साथ
मुझे संभाला उन्होंने
लड़कपन के साथ
क्या लिखूँ मैं उनके बारे में
उन्हें शब्दों में समेटना मुश्किल है
दिल में कई अरमान हैं मेरे
अपने पापा को लेकर
ये कागज़, ये कलम
नाकाफ़ी हैं बयानी में
जब मुश्किल रहा समय
सर हाथ उनका काफी रहा
मुझे बड़े नाज़ों से पाला उन्होंने
हर वक्त उनकी जुबाँ पर मेरा नाम रहा
आज अकेली बैठी याद करती हूँ
ले आँखों में आँसू उन्हें प्यार करती हूँ
मेरे पापा तुम कितने पास हो दिल के
हर शब्द में सिर्फ ज़ज्बात लिखती हूँ
ये प्यार कुछ नहीं उस दुलार के आगे
मेरे आँखों में आँसू हों
परेशाँ आप होते हैं
मेरे बोल हर वक्त याद रखते हैं
एक सच बताऊँ तो हँसना नहीं
डरता है हीरो आप से
मेरे पापा, आप शान हो मेरी मेरी
हिम्मत एक पहचान हो मेरी
चँद शब्दों में, मैं कह नहीं सकती
इतना जान लो बस "जान" हो मेरी।
रूचि शुक्ला
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