नन्हा प्यारा ख़्वाब
हाथ में कलम है
मन में है ख्याल
आज कुछ लिखूँ मैं
हो शब्दों का एक जाल।
साथ नहीं देता पर
मन चंचल है आज
गोद में हो मेरे नन्हा प्यारा ख्वाब।
सुकोमल और सुरमयी
छोटी सी है आस
घर मेरे भी खेले
किल्कारी का राग।
छुई–मुई , छुई-मुई ऐसा हो
मीठा सा रसगुल्ला
नन्हें पाँव दौडें मेरे घर के अंगना।
बचपन , अब फिर लौटे
उसके संग सहारे
हंस कर देखे , प्यार करे
नन्हें हाथ पसारे
उंगली को जो पकड़े
छोड़े नहीं छुड़ावे
O'God ये कर दो,छोटा सा करिश्मा
अब जल्दी हो पूरा, देखा है जो सपना।
रूचि शुक्ला
हाथ में कलम है
मन में है ख्याल
आज कुछ लिखूँ मैं
हो शब्दों का एक जाल।
साथ नहीं देता पर
मन चंचल है आज
गोद में हो मेरे नन्हा प्यारा ख्वाब।
सुकोमल और सुरमयी
छोटी सी है आस
घर मेरे भी खेले
किल्कारी का राग।
छुई–मुई , छुई-मुई ऐसा हो
मीठा सा रसगुल्ला
नन्हें पाँव दौडें मेरे घर के अंगना।
बचपन , अब फिर लौटे
उसके संग सहारे
हंस कर देखे , प्यार करे
नन्हें हाथ पसारे
उंगली को जो पकड़े
छोड़े नहीं छुड़ावे
O'God ये कर दो,छोटा सा करिश्मा
अब जल्दी हो पूरा, देखा है जो सपना।
रूचि शुक्ला
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