बुलंदी तेरी है
ताज़गी तुझसे है
हर वक्त नया है
एक झनकार दे
संगीत बनता है
खिलखिलाते मन से
खुशियाँ हैं सारी
नज़रिये से तेरे
रुख़ बदलता है
बंद घड़ी से
क्या वक्त थमता है ?
आगोश में खुशबू रुका नहीं करती
खुशी की चमक छिपा नहीं करती
ज़िंदगी दे, प्रभु ने उम्मीद बाँधी थी
उस आस को थामे राह संवारे चल
पथिक है , तो राह में मोड़ भी होंगे
तू चालाक है अच्छा , प्रमाण तो लेंगे
चलना है तुझको , ये तेरी गति है
हौसला भर , आगे तेरी बुलंदी है।
रूचि शुक्ला
ताज़गी तुझसे है
हर वक्त नया है
एक झनकार दे
संगीत बनता है
खिलखिलाते मन से
खुशियाँ हैं सारी
नज़रिये से तेरे
रुख़ बदलता है
बंद घड़ी से
क्या वक्त थमता है ?
आगोश में खुशबू रुका नहीं करती
खुशी की चमक छिपा नहीं करती
ज़िंदगी दे, प्रभु ने उम्मीद बाँधी थी
उस आस को थामे राह संवारे चल
पथिक है , तो राह में मोड़ भी होंगे
तू चालाक है अच्छा , प्रमाण तो लेंगे
चलना है तुझको , ये तेरी गति है
हौसला भर , आगे तेरी बुलंदी है।
रूचि शुक्ला
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