कैद पंछी
स्वछंद आकाश के विचरण से दूर
पिंजरे की गोलाई नापता पंछी
थके मालिक की आवाज़ पर सीटी बजाता
कुछ दानों के लिए मोहताज़ पंछी
सूनी आँखों से आकाश को निहारता
लहलहाती डालियों को याद करता
एक खुशहाल घोसले का अरमान लिए
पिंजरे की ओट से झाँकता पंछी
भाषा की दीवार लेकिन प्रेम और विश्वास खोजता पंछी
सुरों में संगीत पर निःशब्दता उसमें
विचारहीन , कल के इंतजार में
एक उड़ान के लिए बेचैन पंछी।
रूचि शुक्ला
स्वछंद आकाश के विचरण से दूर
पिंजरे की गोलाई नापता पंछी
थके मालिक की आवाज़ पर सीटी बजाता
कुछ दानों के लिए मोहताज़ पंछी
सूनी आँखों से आकाश को निहारता
लहलहाती डालियों को याद करता
एक खुशहाल घोसले का अरमान लिए
पिंजरे की ओट से झाँकता पंछी
भाषा की दीवार लेकिन प्रेम और विश्वास खोजता पंछी
सुरों में संगीत पर निःशब्दता उसमें
विचारहीन , कल के इंतजार में
एक उड़ान के लिए बेचैन पंछी।
रूचि शुक्ला
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