अदा से चलो
अदा से चलो तुम जुदा हो बनी
बदल भी गयी कुछ घड़ी के लिये
सच को ये कैसे झुठलाओगी
है पहचान तेरी तुझसे बनी
क्या इसको ही तुम बदल जाओगी
जैसी भी हो तुम वैसी रहो
सच को जियो वही है सही
चाँद की पहचान है चाँदनी
दुल्हन का शर्मीलापन देख लो
ये सब अदा की ही बात है
तुम भी जियो, अपनी पहचान से
लोगों के कहने में जो आ गई
पहचान खुद को ही न पाओगी
अपने ही बोल जो सचकर दीये
क्षितिज पर तुम दमक जाओगी
संसार की तो क्या बात है ?
सागर सी मिठास ले पाओगी।
रूचि शुक्ला
अदा से चलो तुम जुदा हो बनी
बदल भी गयी कुछ घड़ी के लिये
सच को ये कैसे झुठलाओगी
है पहचान तेरी तुझसे बनी
क्या इसको ही तुम बदल जाओगी
जैसी भी हो तुम वैसी रहो
सच को जियो वही है सही
चाँद की पहचान है चाँदनी
दुल्हन का शर्मीलापन देख लो
ये सब अदा की ही बात है
तुम भी जियो, अपनी पहचान से
लोगों के कहने में जो आ गई
पहचान खुद को ही न पाओगी
अपने ही बोल जो सचकर दीये
क्षितिज पर तुम दमक जाओगी
संसार की तो क्या बात है ?
सागर सी मिठास ले पाओगी।
रूचि शुक्ला
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